Tuesday, July 18, 2017

.......कोई आया मेरे पास



इस जामाने में, मेरे लिये कौन आया है मेरे पास ?
ज़रूरततों के लिबास में हर कोई आया मेरे पास

लोग कहते है कि चाहतों की भीड है मेरे पास,
(ये दिल ही ज़ानता है कि बस....)
आरजू के चेहरे में जुस्तजू के साथ आया मेरे पास

गुनाह होगा अगर कहूँ कि खाली हाथ आया मेरे पास
कुछ लाता नहीं तो लब्ज कहा से होते मेरे पास

किस नामुराद को ज़िन्दगी की ऊलझने बुरी लगती है
हर कोई तो उसी मे ऊलझा हुआ आया है मेरे पास


---डॉ आलोक त्रिपाठी (२०१७)