Saturday, May 11, 2019

हर हमसफर मंजिल नही होता


जब कभी मै उसकी तलाश था ही नही 
फिर खुद को तराशने से क्या फायदा?

वो हर पल किसी और को ढूढ़ता रहा 
मै बस खुद को ही और सवारता रहा 

हर हमसफर मंजिल नही होता इश्क में 
जान ही नही पाया, बस मासूम बना रहा 

जब ये सच समझा तब बहुत देर हो गयी
उसकी तलाश में मै एक हमराह बना रहा 

अप्रैल १२, २०१९ अलोक त्रिपाठी 



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